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वॉशिंगटन। बीते कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चल रहा है। अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान को न केवल डराने और धमकाने में लगे हैं बल्कि हर तरह से उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए है। लेकिन ईरान पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है न वो डरा और न ही किसी दवाब में आया है। इससे खिसिया रहे अमेरिका और इजराइल ने अब नया प्लान तैयार किया है। इस नई रणनीति का मुख्य केंद्र ईरान का तेल निर्यात है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसारए ईरान के कुल तेल निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीन द्वारा खरीदा जाता है। अमेरिका का मानना है कि यदि चीन इस खरीद में कटौती करता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी जिससे वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर नरम रुख अपनाने के लिए मजबूर होगा। इसी दिशा में कदम उठाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नए आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। यह आदेश अमेरिका को उन देशों पर 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स लगाने का अधिकार देता है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखते हैं। सीधा संदेश चीन के लिए है कि यदि उसने ईरानी तेल खरीदना बंद नहीं कियाए तो उसे भारी आर्थिक हर्जाना भुगतना पड़ सकता है।
वॉशिंगटन में हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक ने पश्चिम एशिया की भू.राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में हुई इस महत्वपूर्ण वार्ता में ईरान के खिलाफ एक सख्त आर्थिक और सैन्य रणनीति अपनाने पर सहमति बनी है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर हैए जिसे देखते हुए अमेरिका ने पहले ही मध्य पूर्व में अपने दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर रखे हैं। अब इस सैन्य घेराबंदी के साथ.साथ ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए नई योजना तैयार की गई है। हालांकि यह राह इतनी आसान नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही व्यापार और तकनीक को लेकर विवाद चल रहे हैं। ऐसे में नया टैक्स विवाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव को और बढ़ा सकता है। साथ ही अमेरिका को इस बात का भी ध्यान रखना है कि इस कड़े रुख से चीन के साथ होने वाली उसकी अन्य उच्चस्तरीय वार्ताएं प्रभावित न हों। इसके बावजूदए अमेरिकी प्रशासन अधिकतम दबाव की अपनी नीति पर अडिग नजर आ रहा हैए जहां एक तरफ परमाणु बातचीत की मेज खुली रखी गई हैए तो दूसरी तरफ सैन्य ताकत का प्रदर्शन जारी है।
इस बैठक में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच एक बुनियादी सहमति तो बनी कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगेए लेकिन इसके रास्ते को लेकर दोनों नेताओं के विचारों में स्पष्ट अंतर भी दिखा। प्रधानमंत्री नेतन्याहू का स्पष्ट मानना है कि ईरान के साथ किसी भी तरह का अच्छा समझौता संभव नहीं है क्योंकि वह कभी भी शर्तों का पालन नहीं करेगा। दूसरी ओरए ट्रंप का रुख थोड़ा लचीला हैय उनका मानना है कि समझौते की संभावना अभी भी बची है और एक अंतिम कोशिश की जानी चाहिए। शनिवार को ट्रंप ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि यदि कूटनीतिक बातचीत विफल होती हैए तो क्षेत्र में तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अपनी भूमिका निभाएंगे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि आने वाले दिनों में ईरान पर आर्थिक और सामरिक दबाव और अधिक बढ़ने वाला है।
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