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ईरान ने अमेरिका को दिया सटीक जवाब

तेहरान। ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध की परिस्थितियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और उन पर आने वाली प्रतिक्रियाओं ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान अपना यूरेनियम भंडार सौंपने को तैयार है, लेकिन शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने स्पष्ट किया कि उसका यूरेनियम भंडार कहीं नहीं जा रहा है और वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। यह स्थिति एक बार फिर दिखाती है कि दोनों देशों के बीच सूचनाओं और दावों को लेकर कितना बड़ा अंतर है।

यूरेनियम विवाद के बावजूद, ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का दूसरा दौर जल्द ही शुरू हो सकता है। एक संक्षिप्त साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करने के लिए उत्सुक है और संभवतः इस सप्ताहांत ही दोनों पक्षों के बीच बैठक हो सकती है। ट्रंप का यह रुख युद्धविराम की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, हालांकि जमीनी हकीकत अब भी जटिल बनी हुई है। इसके साथ ही, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग को स्थायी रूप से खुला रखने पर सहमत हो गया है और अब इसे कभी दुनिया के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। फरवरी में शुरू हुए संघर्ष के दौरान ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया था और तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। वर्तमान में, ईरान ने अस्थायी रूप से इस मार्ग को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया है, ताकि युद्धविराम की अवधि के दौरान सुरक्षित व्यापार सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि, ईरान ने अभी तक ट्रंप के उस दावे की पुष्टि नहीं की है जिसमें इसे स्थायी रूप से खुला रखने का संकल्प बताया गया है।

ईरानी अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी दीर्घकालिक गारंटी देने से परहेज किया है, जिससे यह अनिश्चितता बनी हुई है कि युद्धविराम की समाप्ति के बाद इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की स्थिति क्या होगी। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के भविष्य को देखते हुए पूरी दुनिया की नजरें अब आगामी संभावित वार्ता पर टिकी हैं।


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