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कावेरी जल विवाद सुलझाने की पहल

सालों साल पुराने मसले को सुलझाने की पहल शुरु

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच जल्द ही एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। कावेरी जल विवाद को लेकर बुलाई गई यह बैठक भारतीय राजनीति और अंतरराज्यीय संबंधों में बेहद चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, मुख्यमंत्री थलपति विजय का यह कदम तमिलनाडु के पिछले तीन दशक पुराने पारंपरिक रुख से पूरी तरह अलग है। इससे पहले तमिलनाडु हमेशा सीधी बातचीत के बजाय अदालती फैसलों, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और ट्रिब्यूनल के आदेशों पर ही निर्भर रहा है। तमिलनाडु का लंबे समय से यह मानना था कि कावेरी विवाद केवल दो मुख्यमंत्रियों की मेज पर बैठकर नहीं सुलझ सकता। हालांकि, मुख्यमंत्री विजय इस लीक से हटकर 31 जुलाई से 3 अगस्त के बीच सीधी बातचीत का प्रस्ताव रख रहे हैं।

यदि यह मुलाकात सफल होती है, तो पिछले 14 वर्षों में यह पहला अवसर होगा जब दोनों राज्यों के शीर्ष नेता आमने-सामने बैठकर इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करेंगे। विजय का उद्देश्य कानूनी अधिकारों से समझौता किए बिना संकट के समय पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस वार्ता की मुख्य वजह तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पैदा हुआ गंभीर जल संकट है। ट्रिब्यूनल के तय मानकों के अनुसार 1 जून से 23 जुलाई के बीच तमिलनाडु को करीब 32 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था, लेकिन उसे केवल 3.5 टीएमसी पानी ही प्राप्त हुआ है। पानी की भारी कमी के कारण डेल्टा क्षेत्र में फसलें सूखने की कगार पर हैं, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकी, इस पहल को लेकर तमिलनाडु में विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कुछ आशंकाएं जताई हैं।

आलोचकों का तर्क है कि सीधी बातचीत से कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण को दरकिनार करने का मौका मिल सकता है या वह मेकेदातु डैम परियोजना पर तमिलनाडु का विरोध वापस लेने का दबाव बना सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नेताओं की वार्ता आपसी सौहार्द तो बढ़ा सकती है, पर यह सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल द्वारा तय अधिकारों का विकल्प नहीं बन सकती। राजनीतिक दृष्टिकोण से विजय के पास यह लाभ है कि कर्नाटक की सत्तासीन सरकार से उनके बेहतर संबंध हैं। हालांकि जल विवादों में अक्सर स्थानीय जनभावनाओं के आगे राजनीतिक रिश्ते पीछे छूट जाते हैं। यदि विजय इस बैठक से राज्य के लिए तुरंत पानी हासिल करने में सफल रहते हैं, तो यह उनकी बड़ी कूटनीतिक जीत होगी, अन्यथा विफल रहने पर आलोचक इसे राजनीतिक अपरिपक्वता कहेंगे।

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