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नीट सुसाइड मामले

फिर दुखद समाचार सामने आया है एक और नीट अभ्यर्थी ने असफल रहने पर सुसाइड का रास्ता अख्तियार किया है। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में 19 साल की मेडिकल छात्रा अंकिता सांगले ने रविवार को आत्महत्या कर ली। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें अंकिता ने लिखा कि परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलने से वह मानसिक तनाव में थी और डॉक्टर बनने का उसका सपना अधूरा रह गया।

परिवार के मुताबिक घटना से पहले छात्रा अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी। काफी देर तक कमरे से कोई आवाज नहीं आने पर उसकी मां ने दरवाजा खोला, जहां वह मृत मिली।यह कोई इकलौता मामला नहीं है पिछले ढाई माह में करीब दो दर्जन छात्र छात्राओं ने नीट परीक्षा के मनोकल्पित दबाव और इस से पैदा हुए अवसाद के चलते मौत को गले लगा लिया। जबकि मीडिया रिपोर्ट्स की एक हालिया एनालिसिस (मई 2026) के अनुसार, पिछले 5 वर्षों (2021 से 2026 के बीच) में देश में नीट से जुड़े कम से कम 93 छात्रों की आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें सबसे बड़ा केंद्र कोटा (कम से कम 40 मामले) रहा है।अपुष्ट आंकड़ों के अनुसार यह तादाद बहुत अधिक हो सकती है। सुसाइड के पीछे के मुख्य कारणविशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन के अनुसार छात्रों द्वारा ऐसे कदम उठाने के पीछे ये मुख्य वजहें सामने आई हैं अत्यधिक शैक्षणिक तनाव रूकोचिंग सेंटरों में होने वाले वीकली टेस्ट और नीट परीक्षा को पास करने का मानसिक बोझ। परिजनों की उम्मीदें रूमध्यवर्गीय या गरीब परिवारों से आने वाले छात्रों पर माता-पिता की उम्मीदों और पढ़ाई पर होने वाले भारी खर्च का दबाव होता है। 

आपको बता दें छात्र नीट  परीक्षा को लेकर भारी प्रतिस्पर्धा, पेपर लीक व परीक्षा रद्द होने की अनिश्चितता, और कम सीटें होने के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव में आ जाते हैं।इस का एक बड़ा कारण अत्यधिक प्रतिस्पर्धा कम सीट और परीक्षा की तैयारी से पैदा दबाव है। लाखों छात्रों के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीमित सीटें होना।परिवार और खुद की उम्मीदों पर खरा उतरने का भारी मानसिक दबाव।लंबे समय तक पढ़ाई के कारण नींद पूरी न होना और सेहत बिगड़ना।इन सबके पार्श्व में माता पिता परिवार की महत्वाकांक्षा और बच्चे को डाक्टर बनाने का ही एक मात्र जीवन लक्ष्य थोपना सबसे घातक और बच्चे की मनस्थिति को प्रभावित करता है ।

परीक्षा का बार-बार रद्द होना और दोबारा परीक्षा होना छात्रों की मानसिक शांति को तोड़ देता है। एनटीए  के परिणामों में गड़बड़ी के आरोप और अंकों में भारी अंतर आने की खबरें छात्रों को तोड़ रहीं हैं। नीट एग्जाम में हुई गड़बड़ियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन खत्म हो गया था। प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी सुसाइड का यह प मामला सामने आया है। नीट मुद्दे पर अब तक 23 स्टूडेंट आत्महत्या कर चुके हैं।अंकिता ने सुसाइड नोट में लिखा कि री-एग्जाम में उसे 166 मार्क्स मिले, जबकि कटऑफ 177 था। मेरे इस कदम के लिए उसके माता-पिता और भाई को जिम्मेदार न ठहराया जाए। अंकिता ने भाई को लिखा कि मम्मी-पापा को संभालना। उन्होंने काफी त्याग किया, लेकिन मैं सपना पूरा नहीं कर सकी । 

गुजरात के सूरत में 18 जून को 17 साल के कहान पटेल ने अपनी जान ले ली थी। इनके परिवार का कहना है कि वे नीट परीक्षा से जुड़े तनाव और पेपर लीक से परेशान थे।कहान पटेल के पिता प्रशांत पटेल ने बताया कि 12 मई को कोचिंग क्लास के दौरान बेटे को नीट पेपर लीक की खबर मिली। इसके बाद वह तुरंत सूरत से अहमदाबाद पहुंचा। प्रशांत पटेल के मुताबिक, पेपर लीक की खबर के बाद उनका बेटा मानसिक तनाव में रहने लगा था। उसके व्यवहार में भी बदलाव आने लगा था, जिसके बाद यह दुखद घटना हुई।

पिछले करीब ढाई माह में दो दर्जन नीट अभ्यर्थियों ने आत्महत्या कर ली है। इन में से हरियाणा-1दिल्ली - 2 राजस्थान- 2 उत्तराखंड-1 उत्तर प्रदेश- 4 गुजरात- 1-

महाराष्ट्र- 3-मध्य प्रदेश - 3 गोवा - 1 तेलंगाना -1 तमिलनाडु-4 ने जान दी है। 

आपको बता दें कि 14 मई-गोवा 17 साल के नीट स्टूडेंट ने आत्महत्या की। यह परीक्षा रद्द होने के बाद सुसाइड का पहला केस था।14 मई को ही उत्तर प्रदेश नयीमपुर खीरी में 21 साल के नीट छात्र ऋतिक मिश्रा ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली।14 मई- दिल्ली 20 साल की छाजा ने नीट परीक्षा अचानक रद्द होने से तनाव में आकर आत्महत्या कर ली।

16 मई- राजस्थान 22 साल के प्रदीप मेघवाल ने आत्महत्या की। परिवार ने परीक्षा रद्द होने तनाव की बात कही।20 मई- मध्य प्रदेश आकांक्षा चतुर्वेदी ने आत्महत्या की। सुसाइड नोट में दोबारा परीक्षा देने का डर जताया था।

25 मई- महाराष्ट्र लातूर में 18 साल के नीट छात्र के आत्महत्या का मामला सामने आया।

3 जून- मध्य प्रदेश मऊगंज जिले की निवासी आकांक्षा चतुर्वेदी ने सुसाइड नोट में लिखा- दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची।13 जून- दिल्ली 7 साल की नीट छात्रा अपने घर में मृत मिली। पुलिस ने आत्महत्या का मामला बताया।15 जून- राजस्थान सीकर में 22 साल के उमेश ने आत्महत्या कर ली। उसने तीसरी बार नीट परीक्षा दी थी।

16 जून- उत्तर प्रदेश लखनऊ में 17 साल की छात्रा ने फांसी लगाकर जान दे दी। एग्जाम कैंसिल होने से वह तनाव में थी।

16 जून- उत्तराखंड देहरादून में 23 साल की रिया कुमारी घर पर मृत पाई गईं। पुलिस को घर से सुसाइड नोट मिला।

17 जून- तमिलनाडु कोयंबटूर में 19 साल की छात्रा अनुकीर्तना ने जहर खाकर जान दे दी। उसने री-एग्जाम को लेकर डर जताया था।

17 जून- गुजरात अहमदाबाद में 17 साल के छात्र ने आत्महत्या कर ली। वह अपने घर की बिल्डिंग के छठे माले से कूद गया था।

18 जून- मध्य प्रदेश इंदौर में 21 साल की अवंतिका मौर्य तीसरे फ्लोर से कूद गई। पेपर लीक के कारण वह हताश थी।

18 जून- उत्तर प्रदेश गाजियाबाद में 22 साल के जतिन कुमार ने फांसी लगा ली। वह कई सालों से नीट की तैयारी कर रहा था।

19 जून- तमिलनाडु सेलम में दो साल से नीट की तैयारी करने वाली गोपिका ने री-एग्जाम के तनाव से आत्महत्या कर ली।19 जून- तमिलनाडु धर्मपुरी में रोशिनी नाम की छात्रा घर पर मृत मिलीं। वह 12वीं के बाद नीट की तैयारी कर रही थीं।

20 जून- तमिलनाडु कृष्णागिरि में वेत्री आनंदन नाम के छात्र ने री-एग्जाम से परेशान होकर जान दे दी। उसने दो बार नीट परीक्षा दी थी।

20 जून- तेलंगाना हैदराबाद में 19 साल की शेख सना ने सुसाइड कर लिया। वह री-एग्जाम के कारण दबाव में थी।

21 जून- हरियाणा हिसार में 19 साल की सिमरन ने कीटनाशक पीकर जान दे दी। वह 2 बार नीट परीक्षा दे चुकी थी।

23 जून- उत्तर प्रदेश महाराजगंज में नीट री-एग्जाम देने के बाद 19 साल की चंचल भारती ने आत्महत्या कर ली।

24 जून- महाराष्ट्र हिंगोली में 18 साल के सुशील धागे ने आत्महत्या कर ली। उसने एक वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी मां से माफी मांगी।

27 जुलाई- महाराष्ट्र महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली।

ज्यादातर घटनाओं के लिए परिवार अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों की रूचि सामर्थ्य खास विषय को समझने की क्षमता हाईस्कूल इंटरमीडिएट का शैक्षणिक रिकॉर्ड पर विचार किए बिना नीट परीक्षा क्वालिफाई कर डाक्टर बनने का टास्क देना जिम्मेवार है। दरअसल सब विषय सभी की रूचि और समझ के नहीं होते हैं हर इंसान की एक विशिष्ट शारीरिक एवं मानसिक संरचना है जरूरी नहीं है कि जीवन का ध्येय बिना सोचे समझे सिर्फ नीट क्वालिफाई करना ही बना दिया जाए अपने किशोर बच्चों की रूचि और क्षमता का आकलन कीजिए। मेरा तो सुझाव है कि यदि किसी छात्र छात्रा ने हाईस्कूल इंटर में 95 फीसदी से अधिक मार्क्स हासिल किए हैं तो उसे ही नीट परीक्षा में सम्मिलित होना चाहिए क्योंकि सिर्फ अपवाद को छोड़ कर कमजोर बेस मार्क्स वाले छात्र नीट की प्रतिस्पर्धा में सफल नहीं हो पाते हैं। 720 नम्बर की इस परीक्षा में 180 नम्बर पर क्वालिफाई हो जाता है लेकिन इसके आगे कठिन प्रतिस्पर्धा है आम तौर पर सिर्फ 600 मार्क्स हासिल करने वाले छात्र ही सरकारी कालेज में एमबीबीएस सीट सुरक्षित कर पाते हैं। इस से कम मार्क्स वाले छात्रों के लिए सिर्फ निजी कालेज ही मिलता है जिसमें मेडिकल पढाई के लिए साढ़े चार साल में अस्सी लाख से डेड़ करोड़ तक का फीस चुकाना आम परिवार के लिए आसान नहीं है। ऐसे हालात में सिर्फ विशेष योग्यता वाले मजबूत मनस्थिति और ईरादे से दृढ़ और असफलता पर निराश नहीं होने वाले बच्चों को ही नीट के लिए प्रेरित करें अन्यथा बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करना उचित नहीं है। बच्चों के मन में गहराई तक यह विचार डाल दें कि वह अपना श्रेष्ठ प्रयास करें लेकिन सिर्फ नीट ही जीवन का एक मात्र उपाय नहीं है असफल होने पर उसे स्वीकार करें दूसरे मेडिकल या पैरामेडिकल कोर्सों में भी सफलता के शिखर पर पहुंच सकते हैं। जीवन है तो रास्तों की कमी नहीं है लेकिन यदि जीवन ही खत्म कर दिया तो उस परिवार माँ बाप का क्या होगा जिन्होंने अपने जीवन के बहुत सारे साल आपकी परवरिश पर लगा दिए क्या सुसाइड नोट में लिखा सॉरी उन आंखों के आंसूओं को सोख पाएगा। क्या एक बेहतरीन जिंदगी सिर्फ डाक्टर ही जी रहे हैं?जानकारी के लिए बता दें कि अधिकांश डॉक्टर जो निजी अस्पताल के स्वामी नहीं है अपने बच्चों को दूसरे स्ट्रीम में भेज रहे हैं। ऐसा क्योंकि उन्होंने डाक्टर के जीवन के ग्लैमर से अधिक लंबी बोझिल ड्यूटी संक्रामक रोगों से स्वयं को बचाने मरीज़ के प्रति प्रतिबद्धता के तनाव को नजदीक से अनुभव किया है। डॉक्टर का पेशा सेवा का ही क्षेत्र है चाहे वह किसी भी स्तर पर आसीन हो। दूसरे प्रोफेशनल कोर्स निजी क्षेत्र के व्यवसाय भी एक स्वावलंबी बेहतरीन प्रतिष्ठित जीवन यापन का माध्यम बन सकते हैं। इस लिए अपने आंख के तारों की जीवन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए किसी भी कैरियर कंपटीशन परीक्षा को गौण दर्जा दीजिए जीवन है तो सब कुछ है जीवन ज्योति ही अस्त हो गई तो अंधेरा ही अंधेरा है। 

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