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सूखे जून ने झुलसाया, बारिश को तरसे

नई दिल्ली ।  देश में मौसम का कहर लोगों पर एक बड़ी आफत बनकर टूट रहा है। मॉनसून का मौसम होने के बावजूद, बारिश की बूंदें अभी तक अधिकांश हिस्सों में राहत नहीं दे पाई हैं, और पूरा जून महीना न केवल सूखा निकला बल्कि इसने बीते 125 साल के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया है। जून 2026, सवा सौ साल के मौसम इतिहास का पांचवां सबसे सूखा महीना दर्ज किया गया है, जिसने देशभर में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अब लोगों की उम्मीदें जुलाई के महीने पर टिकी हैं, लेकिन कमजोर मॉनसून और अल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए जुलाई को लेकर भी आशंकाएं बढ़ गई हैं।

भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में पूरे देश में मात्र 99.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से लगभग 39.8 प्रतिशत कम है। 30 दिनों के इस महीने में देश के ज्यादातर हिस्सों में सूखे की स्थिति बनी रही और लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि 1901 के बाद से, बीता जून महीना 125 साल का पांचवां सबसे सूखा जून दर्ज किया गया है, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मॉनसून तीन दिन की देरी से दक्षिण भारत के केरल पहुंचा और उसके बाद लगभग दो हफ्ते तक उसकी आगे बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी रही। हैरानी की बात यह है कि केरल में भी मॉनसून ने झमाझम बारिश नहीं की, बल्कि वहां भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद भी मॉनसून लगातार देरी से ही आगे बढ़ रहा है और उसकी तीव्रता कमजोर बनी हुई है।

अब लोगों की सारी उम्मीदें जुलाई की बारिश पर टिकी हैं। यह देखा जाना है कि जून की कमी कितनी पूरी हो पाती है और क्या मॉनसून अपनी खोई हुई रफ्तार वापस पा पाएगा। हालांकि, जून की खराब हालत और सुपर अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए लोगों को बारिश की चिंता सता रही है, और यह डर भी है कि कहीं जुलाई का महीना भी गर्मी और सूखे को और न बढ़ा दे। लेकिन, इस बीच वैज्ञानिकों की ओर से जुलाई को लेकर कुछ राहत का अनुमान भी लगाया जा रहा है, जिससे एक मिली-जुली तस्वीर सामने आती है। आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएगा कि प्रकृति का रुख क्या रहता है और क्या देश को इस सूखे से राहत मिल पाती है या नहीं।

बारिश में इस भारी कमी के पीछे जलवायु संकट एल-नीनो को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। प्रशांत महासागर में विकसित हुआ एल-नीनो ही इस बार मॉनसून के सुस्त पड़ने और कमजोर रहने का मुख्य कारण है। हालांकि, विशेषज्ञ कुछ आशा की किरण भी दिखाते हैं। वे कहते हैं कि 1951 से 2025 तक के रिकॉर्ड के मुताबिक, कमजोर जून के बाद 58 प्रतिशत मामलों में मॉनसून ने जुलाई- अगस्त में रिकवरी की थी, जबकि 31 प्रतिशत मामलों में पूरा सीजन कमजोर रहा और सूखे के हालात बने रहे। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि भले ही जून खराब रहा हो, लेकिन मॉनसून में सुधार की संभावना अभी भी बनी हुई है। जहां तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात है, तो यहां भी हालात काफी चिंताजनक हैं। 

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