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अमेरिका में 92,000 नौकरियां कम हुई

वाशिंगटन । अमेरिका में फरवरी माह के दौरान रोजगार के मोर्चे पर गिरावट दर्ज हुई है, जिससे अर्थव्यवस्था में संभावित कमजोरी के संकेत दिख रहे हैं। श्रम मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार फरवरी में कुल 92,000 नौकरियां कम हुई है। नॉनफार्म पेरोल में यह गिरावट पिछले पांच महीनों में तीसरी बार दर्ज की गई है, जिससे श्रम बाजार की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई है। कई प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार घटने के कारण यह स्थिति बनी है। हेल्थकेयर सेक्टर में करीब 28,000 नौकरियां कम हुईं। इसके पीछे एक बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में हुई हड़ताल को मुख्य कारण बताया जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि श्रम बाजार में कमजोरी के संकेत पहले से दिखाई दे रहे थे। उनके अनुसार स्थिति चिंताजनक जरूर है, लेकिन फिलहाल बड़े आर्थिक संकट की संभावना कम है। हालांकि आने वाले महीनों में रोजगार वृद्धि की रफ्तार धीमी रह सकती है। उन्होंने कहा कि टैक्स और टैरिफ रिफंड अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक पहलू हैं, जबकि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। एक अन्य जानकार ने बताया कि कमजोर रोजगार आंकड़ों के पीछे खराब मौसम भी कारण हो सकता है। फरवरी में अमेरिका के कई इलाकों में भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड देखी गई। इसका असर खासतौर पर रेस्टोरेंट और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों पर पड़ा। रेस्टोरेंट सेक्टर में करीब 30,000 और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में लगभग 11,000 नौकरियां कम हो गईं। अन्य क्षेत्रों में भी गिरावट देखी गई है। इन्फॉर्मेशन सर्विसेज सेक्टर में 11,000 नौकरियां कम हुईं, जिसका एक कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी संरचनात्मक बदलाव और लागत कटौती को माना जा रहा है। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी 12,000 नौकरियां घटीं। इस बीच मजदूरी में अपेक्षा से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। औसत प्रति घंटे की कमाई महीने-दर-महीने 0.4 प्रतिशत और साल-दर-साल 3.8 प्रतिशत बढ़ी है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल लगातार खराब आंकड़े आने की संभावना तय नहीं है, लेकिन आर्थिक मंदी का जोखिम बढ़ा है। साथ ही फेडरल रिजर्व सिस्टम भी श्रम बाजार की स्थिति पर नजर रखे हुए है और ब्याज दरों में संभावित कटौती के सही समय का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

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