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बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त को कैबिनेट मंत्री का दर्जा

नई दिल्ली। भारत सरकार ने बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने और उन्हें पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। मोदी सरकार ने बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा दिया है, जो इस पद पर नियुक्त किसी भी राजनेता के लिए एक अभूतपूर्व कदम है। अपने परिचय पत्र सौंपने के तुरंत बाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए दो साल से बंद पड़ी वीजा सेवाएं फिर से शुरू करने की भी घोषणा की है।

गृह मंत्रालय ने 24 जून के एक कार्यालय ज्ञापन में बताया है कि दिनेश त्रिवेदी को टेबल ऑफ प्रेसिडेंस में बिना कोई संशोधन किए व्यक्तिगत तौर पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह दर्जा केवल औपचारिक समारोहों के लिए मान्य होगा। टेबल ऑफ प्रेसिडेंस का इस्तेमाल राजकीय और औपचारिक समारोहों के दौरान संवैधानिक अधिकारियों,  मंत्रियों, जजों, राजनयिकों और अधिकारियों का पदानुक्रम तय करने के लिए किया जाता है। इस दर्जे का अर्थ है कि प्रोटोकॉल के लिहाज से उन्हें एक कैबिनेट मंत्री के समान महत्व दिया जाएगा, जिससे उनके कूटनीतिक प्रभाव और देश की ओर से दिए गए सम्मान का प्रदर्शन होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता दिनेश त्रिवेदी बांग्लादेश में इस पद पर सेवा देने वाले पहले राजनेता हैं। उन्होंने 1994 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रणय वर्मा की जगह ली है। यह पहली बार है जब बांग्लादेश में किसी भारतीय दूत को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, जो बांग्लादेश के साथ भारत के विशेष संबंधों को दर्शाता है। हालांकि, इससे पहले भी भारत के कुछ प्रमुख राजदूतों को विशेष परिस्थितियों में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल चुका है, जैसे आईके गुजराल (यूएसएसआर), डॉ. कर्ण सिंह (अमेरिका) और त्रिलोकी कौल (यूएसएसआर)।

अपने नए पदभार संभालने के साथ ही, दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के सभी पांच वीजा आवेदन केंद्रों - ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट और खुलना से यात्रा वीजा सेवाएं फिर से शुरू करने की घोषणा की है। साल 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद बनी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान यह सेवा रोक दी गई थी। दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों और सुरक्षा हालातों को देखते हुए करीब दो साल पहले वीजा सेवाओं पर रोक लगाई गई थी, जिससे आम लोगों, पर्यटकों और व्यापारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इन सेवाओं की बहाली से दोनों देशों के बीच आवाजाही और व्यापारिक संबंध फिर से मजबूत होने की उम्मीद है। दिनेश त्रिवेदी द्वारा परिचय पत्र सौंपने के बाद, बांग्लादेश के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव मोहम्मद सरवर आलम ने बताया कि राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को उम्मीद है कि त्रिवेदी के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच लोगों पर केंद्रित और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध और अधिक गहरे होंगे। इसके जवाब में दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि दो संप्रभु राष्ट्रों के बीच दोस्ताना और सौहार्दपूर्ण संबंध होना स्वाभाविक है, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत बंधनों को दर्शाता है। भारत सरकार द्वारा एक अनुभवी राजनेता को ढाका भेजने का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दोनों पक्ष 2024 के घटनाक्रमों के बाद तनावपूर्ण हुए द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और आपसी विश्वास को फिर से स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।


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