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कई देशों में देते हैं महिलाओं को पीरियड्स लीव

नई दिल्ली। देशभर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को पीरियड्स के दौरान होने वाली तकलीफों के मद्देनजर अनिवार्य अवकाश की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया है। कोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर नीति बनाने का निर्णय सरकार को करना चाहिए और इसके लिए सभी पक्षों से विचार-विमर्श जरूरी है। कई देशों में महिलाओं को पीरियड्स की लीव मिलती है। साथ ही भारत के कई राज्यों में भी पीरियड्स की लीव की व्यवस्था है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जापान पीरियड लीव लागू करने वाले पहले देशों में से एक है। यह एक कानूनी अधिकार है, लेकिन कंपनियां तय करती हैं कि छुट्टी सवैतनिक होगी या अवैतनिक। वहीं इंडोनेशिया में महिलाओं को पीरियड्स आने पर प्रति माह दो दिन की सवैतनिक छुट्टी का अधिकार है। ताइवान में रोजगार में लैंगिक समानता अधिनियम के तहत, महिलाएं तीन दिन की मासिक धर्म की छुट्टी ले सकती हैं, आमतौर पर आधे वेतन पर। दक्षिण कोरिया में महिलाओं को प्रति माह एक दिन की छुट्टी मिलती है। दिलचस्प बात यह है कि यदि वे छुट्टी का इस्तेमाल नहीं करती हैं, तो उनकी कंपनी उन्हें अतिरिक्त मुआवजा देती है।

रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय रूप से मातृ दिवस के रूप में जाना जाने वाला, जाम्बियाई कानून महिलाओं को बिना किसी पूर्व सूचना के प्रति माह एक दिन की छुट्टी लेने की अनुमति देता है। वियतनाम में कार्यरत महिलाएं अपने मासिक धर्म के दौरान 30 मिनट का दैनिक अवकाश या तीन दिन की छुट्टी में से किसी एक को चुन सकती हैं। स्पेन में ऐसा कानून पारित करने वाला पहला यूरोपीय देश है। यह कानून गंभीर दर्द के लिए तीन से पांच दिन की छुट्टी की अनुमति देता है, जिसका खर्च सरकार वहन करती है ताकि महिलाओं के प्रति भर्ती में भेदभाव को रोका जा सके। भारत के पांच राज्य में पीरियड लीव मिलती हैं। उनमें कर्नाटक उन भारतीय राज्यों में शामिल है जिन्होंने मासिक धर्म अवकाश की जरुरत को मान्यता दी है। बिहार राज्य ने 2 जनवरी 1992 को महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए लगातार दो दिनों का सवैतनिक अवकाश घोषित किया था। कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद, केरल के विश्वविद्यालयों ने मासिक धर्म अवकाश की अनुमति देना शुरू कर दिया है।

ओडिशा ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की महिला कर्मचारियों के लिए एक दिन का सवैतनिक अवकाश लागू किया। यह घोषणा तत्कालीन उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिदा ने राज्य के 78वें भारतीय राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर की। सिक्किम हाईकोर्ट रजिस्ट्री के नियमों के मुताबिक महिला कर्मचारी चिकित्सा अधिकारी की सिफारिश पर प्रति माह 2-3 दिन का मासिक धर्म अवकाश ले सकती हैं। सिक्किम विश्वविद्यालय भी महिला छात्रों और कर्मचारियों को एक दिन का मासिक धर्म अवकाश प्रदान करता है।

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