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नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने एक अभूतपूर्व कदम उठाए

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दोहरे दबाव ने ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। सैन्य शक्ति और उन्नत ड्रोन तकनीक का दम भरने वाले ईरान की माली हालत इस कदर बिगड़ चुकी है कि अब उसे दुनिया भर से आर्थिक मदद की गुहार लगानी पड़ रही है। इसी कड़ी में, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सोशल मीडिया पर आधिकारिक रूप से अपना बैंक खाता विवरण साझा किया है और भारतीय नागरिकों से दान देने की अपील की है।

ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उन्हें कई भारतीय नागरिकों की ओर से मानवीय सहायता प्रदान करने के अनुरोध प्राप्त हो रहे थे। इन अनुरोधों को आधार बनाकर दूतावास ने एम्बेसी ऑफ ईरान के नाम से भारतीय स्टेट बैंक का खाता नंबर (11084232535) और आईएफएससी कोड (एसबीआईएन 0000691) सार्वजनिक किया है। सहायता राशि भेजने वाले दानदाताओं से अपने भुगतान का स्क्रीनशॉट एक विशेष व्हाट्सएप नंबर पर साझा करने को भी कहा गया है। हालांकि दूतावास इसे शुद्ध रूप से मानवीय सहायता का नाम दे रहा है, लेकिन वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधे तौर पर ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालने की एक कोशिश है।

ईरान की तिजोरी खाली होने के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के प्रमुख तेल क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों पर की गई बमबारी ने उसकी आय के मुख्य स्रोतों को तहस-नहस कर दिया है। इसके अलावा, पिछले वर्ष परमाणु वार्ता विफल होने के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने विदेशी व्यापार को ठप कर दिया है। ईरान की मुद्रा रियाल अपनी ऐतिहासिक गिरावट पर है, जिसके चलते वहां की संसद को मुद्रा से चार जीरो हटाने जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा था, फिर भी महंगाई को नियंत्रित नहीं किया जा सका। भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जहां से तेहरान ने मदद की उम्मीद जताई है। इससे पहले मार्च की शुरुआत में बैंकॉक स्थित ईरानी दूतावास ने भी देश के पुनर्निर्माण के लिए इसी तरह की अपील की थी। रोचक तथ्य यह है कि कुछ समय पूर्व बीजिंग में ईरानी दूतावास ने व्यक्तिगत दान लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब भारत और थाईलैंड में सार्वजनिक रूप से बैंक खाते साझा करना यह दर्शाता है कि पिछले कुछ हफ्तों में ईरान के भीतर युद्ध जनित हालात और अधिक बिगड़ गए हैं। तेहरान अब अपनी वॉर मशीन को चलाने और बुनियादी नागरिक सुविधाओं को बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यक्तिगत सहयोग पर निर्भर होता दिख रहा है।

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