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बंगाल मे राजनीतिक माहौल गर्माया

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की सत्तारूढ़ ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाकर कहा कि राज्य में जानबूझकर “अरबी संस्कृति” को बढ़ावा दिया जा रहा है, इससे बंगाल में सनातन परंपरा कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल को “बंगाली हिंदुओं की मातृभूमि” के रूप में सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपी नेता अधिकारी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र और भाजपा पर निशाना  साधा। बंगाली नव वर्ष पोइला बोइशाख के मौके पर शुभकामनाएं देकर उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे “दिल्ली के जमींदारों” द्वारा उनके मतदान अधिकारों को प्रभावित करने के प्रयासों का मुंहतोड़ जवाब दें।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य की राजनीति में सक्रियता दिखाकर कूचबिहार जिले के तूफानगंज में सभा को संबोधित किया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से “घुसपैठियों” के नाम हटाए जा चुके हैं और अब उन्हें देश की सीमा से बाहर करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने राज्य सरकार पर सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग न करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के लिए आवश्यक 600 एकड़ जमीन राज्य सरकार उपलब्ध नहीं करा रही है, इससे बॉर्डर फेंसिंग का काम प्रभावित हो रहा है। शाह ने भरोसा जताया कि यदि बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है, तब 45 दिनों के भीतर फेंसिंग का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। राज्य में इन बयानों के बाद सियासी माहौल और गर्म हुआ है। एक ओर भाजपा राज्य सरकार पर सांस्कृतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रही है, तब दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस केंद्र पर लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप का आरोप लगा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखकर इस तरह की बयानबाजी और तेज हो सकती है, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ने की संभावना है।



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