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शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहा चीन

बीजिंग। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अब चीन ने कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली के लिए एक 4 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव राष्ट्रपति जिनपिंग ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस जायेद अल नहयान के साथ हुई हालिया बैठक के दौरान साझा किया। चीन की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब एक दिन पहले ही उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी को लेकर अमेरिका को कड़े लहजे में चेतावनी दी थी।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया है कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक साझा, विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति के लिए सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है। इसके साथ ही, युद्ध की स्थिति में नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान भी किया गया। जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय कानून की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया को जंगल बनने से बचाने के लिए नियमों का पालन जरूरी है। उन्होंने विकास और सुरक्षा के बीच सामंजस्य बिठाने की बात करते हुए सभी पक्षों से क्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने का अनुरोध किया।

चीन का यह कूटनीतिक प्रयास अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे दो सप्ताह के युद्धविराम के दौरान आया है। हाल ही में पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच 21 घंटे तक लंबी शांति वार्ता चली थी, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। वार्ता विफल होने से युद्धविराम टूटने का खतरा बढ़ गया है। इसी बीच चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने साफ कर दिया कि ईरान के साथ चीन के व्यापार और ऊर्जा समझौते जारी रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चीनी जहाजों की आवाजाही में कोई भी दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रूस और चीन की बढ़ रही है दोस्ती 

क्षेत्रीय संकट के बीच रूस ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है। राष्ट्रपति पुतिन ने ईरानी समकक्ष मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात कर कूटनीतिक समाधान की पेशकश की है। इसी कड़ी में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव फिलहाल चीन के दौरे पर हैं, जहाँ वे पुतिन और जिनपिंग के बीच आगामी उच्च स्तरीय मुलाकातों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। पश्चिम एशिया के इस घटनाक्रम ने वैश्विक शक्तियों के बीच नए कूटनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है।

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