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चड्ढा और मित्तल के बीच कड़ी टक्कर

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में एक बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसमें उन नेताओं को इनाम मिलने की पूरी संभावना है जिन्होंने हाल ही में भाजपा का दामन थामा है। इस कड़ी में सबसे अधिक चर्चा पंजाब से आम आदमी पार्टी छोड़कर आए बागी राज्यसभा सांसदों की है, जिनमें दो प्रमुख नाम केंद्रीय कैबिनेट में एक सीट के लिए आमने-सामने हैं। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के कोटे से केंद्रीय कैबिनेट में एक सीट पक्की मानी जा रही है, लेकिन इसके लिए आम आदमी पार्टी से ही आए दो दिग्गजों, राघव चड्ढा और अशोक मित्तल, के बीच कांटे की टक्कर है। अभी तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि राघव चड्ढा आप वाले कोटे से मंत्री पद के इकलौते दावेदार हैं, लेकिन अब उन्हें अशोक मित्तल से कड़ी चुनौती मिल रही है, जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के संस्थापक और एक अनुभवी राज्यसभा सांसद हैं।

इस राजनीतिक खींचतान को समझने के लिए अप्रैल 2026 के उस घटनाक्रम को देखना होगा, जिसने आम आदमी पार्टी में बड़ा विद्रोह पैदा किया था। 2 अप्रैल 2026 को अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर राघव चड्ढा को राज्यसभा में आप के उप-नेता पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, पार्टी के भीतरूनी कलह का नतीजा यह हुआ कि 24 अप्रैल को राघव चड्ढा के नेतृत्व में आप के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने दल-बदल कानून के तहत 2/3 बहुमत के नियम का इस्तेमाल करते हुए सीधे तौर पर बगावत कर दी और खुद का भाजपा में विलय कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि आप ने जिस अशोक मित्तल को राघव चड्ढा के खिलाफ खड़ा किया था, वे भी चड्ढा के साथ ही भाजपा में शामिल हो गए। अब यही दोनों नेता मोदी कैबिनेट में एक सीट के लिए आमने-सामने हैं, जिसने भाजपा आलाकमान के लिए फैसला लेना मुश्किल कर दिया है।

भाजपा पंजाब में अपना विस्तार करने और आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है। आम आदमी पार्टी के इन दिग्गज नेताओं के आने से राज्यसभा में तो भाजपा को सीधे तौर पर संख्या बल का फायदा हुआ ही है, साथ ही पंजाब की राजनीति में भी उसे बड़े चेहरे मिले हैं। पार्टी इन दल बदलने वाले नेताओं को कैबिनेट में जगह देकर यह संदेश देना चाहती है कि जो भी नेता भाजपा के विजन से जुड़ता है, उसे उचित सम्मान और जिम्मेदारी दी जाती है। राघव चड्ढा की सबसे बड़ी ताकत उनका युवा अपील और राष्ट्रीय मीडिया में उनकी मुखर उपस्थिति है। एक तेजतर्रार युवा नेता और चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में उनकी छवि भाजपा को युवा और शहरी मतदाताओं के बीच सीधी अपील करने में मदद कर सकती है। वहीं, अशोक मित्तल एक शांत, परिपक्व और बेहद रसूखदार नाम हैं। एलपीयू के संस्थापक के तौर पर उनका नेटवर्क पूरे देश में है, और उनका प्रवेश पंजाब के अभिजात वर्ग, अकादमिक और व्यापारिक समुदाय में भाजपा की पैठ मजबूत कर सकता है। 

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