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ऑपरेशन सिंदूर लगभग 13 महीने पहले हुआ था। इस ऑपरेशन में भारत के 6 जवान शहीद हुए थे। जो जवान शहीद हुए हैं उनमें सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफल मेन सुनील कुमार, लॉन्स नायक दिनेश कुमार, अग्नि वीर एम मुरली नाईक, हवलदार सुनील कुमार और सार्जेंट सुरेंद्र जो वायुसेना के थे ऑपरेशन सिंदूर की झडप में शहीद हुए थे। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बयान देते हुए कहा था, हमारी सेना का कोई जवान शहीद नहीं हुआ है। उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए यह भी कहा था, सांसदों को यदि प्रश्न पूछने हैं तो वह पूछें कि सिंदूर में हमारी सफलता क्या थी? ऑपरेशन सिंदूर में हमारे जवान सुरक्षित क्यों रहे? अब 13 महीने के बाद जब वॉर मेमोरियल के त्याग चक्र पर इन सैनिकों के नाम दर्ज हुए हैं तब यह बात खुलकर सामने आ रही है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना के 6 जवान भी शहीद हुए थे। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोंपरांत वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को मरणोपरांत वायु सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।
उल्लेखनीय है ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था। भारतीय सशस्त्र वालों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। यह दावा सरकार की ओर से किया गया था। सरकार ने यह भी कहा था कि हमारे किसी जवान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। ऑपरेशन सिंदूर का 10 मई को संघर्ष विराम हो गया था। संघर्ष विराम को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था, उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया है। वहीं भारत सरकार का कहना था कि पाकिस्तान की सरकार हमारे सामने गिड़गड़ा रही थी। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने युद्ध- विराम स्वीकार किया है। बहरहाल 13 महीने के बाद जिस तरह से खबर निकलकर सामने आ रही है उसमें सबसे बड़ी आपत्ती विपक्ष कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि संसद में रक्षा मंत्री ने झूठ बोला। इसको लेकर विपक्ष ने बवाल मचाना शुरू कर दिया है। इसका असर आने वाले मानसून सत्र में दिख सकता है। विपक्ष यह भी आरोप लगा रहा है, कि ऑपरेशन सिंदूर का जश्न जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनाया था यह शहीद सैनिकों का अपमान था। सरकार ने वास्तविक स्थिति को छुपाए रखा। साथ ही सेना के जवानों का अपमान किया है। इसके साथ ही संसद में गलत बयानी करके संसद को धोखे में रखा है। ऑपरेशन सिंदूर का यह राज खुल चुका है इसके बाद विपक्ष मानसून सत्र में कडे तेवर अपनाने की बात कर रहा है।
विपक्ष का कहना है कि जब चीन के साथ सीमा विवाद हुआ था चीन ने भारतीय सीमा के एक बड़े हिस्से में कब्जा कर लिया था। उस समय भी संसद में सरकार ने गलत बयानी की थी। उस समय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था ना कोई घुसा है, ना ही भारत की किसी जमीन पर कब्जा हुआ है। बाद में यह बातें भी खुलकर सामने आईं जब चीन और भारत के बीच में सीमा विवाद को लेकर चर्चा शुरू हुई। विपक्ष के हाथ में इस बार बहुत सारे मुद्दे हैं, लेकिन इन मुद्दों को विपक्ष सदन के अंदर उठा नहीं पता है। भाजपा के बारे में कहा जाता है की धजी को भी सांप बनाना किसी को सीखना है, तो वह भाजपा से सीख सकता है। विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस सांप को भी धजी बना देती है। कांग्रेस और भाजपा में यही एक सबसे बड़ा अंतर है। भाजपा लंबे समय तक विपक्ष में रही है उसका संगठन मजबूत है। वह छोटी-छोटी सी बातों को इतने विशाल रूप में सामने लेकर आती है कि वह आम लोगों के बीच में प्रभावी भूमिका अदा करने लगती है। वहीं कांग्रेस ज्यादातर समय सत्ता में रही है उसे यह भी नहीं पता मुद्दों को किस तरह से उठाना चाहिए, किस तरह से जनता के बीच ले जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बड़े-बड़े मुद्दे भी ठंडे पड़ जाते हैं। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी को लेकर सारे देश में मामला बहुत गरमाया हुआ है। कांग्रेस इसमें भी बहुत बाद में सक्रिय हुई है। कुछ ही दिनों बाद मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है, विपक्ष के पास बड़े-बड़े मुद्दे हैं लेकिन विपक्ष एकजुट नहीं है। सबकी अपनी डफली और अपना राग है। ऐसी स्थिति में सरकार के माथे पर चिंता की कोई लकीर भी नहीं है। सरकार को पता है विपक्ष उसके सामने कुछ मिनट भी नहीं खड़ा रह पाएगा।
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