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महिला वैज्ञानिक खोजा डायबिटिक अल्सर पैर के घाव का सस्ता इलाज

कोलकाता।  देश में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह के मामलों के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। डॉ जुई चक्रबर्ती ने टाइप.2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए डायबिटिक फुट अल्सर पैर के घाव का एक सस्ता और प्रभावी उपचार विकसित किया है। यह नवाचार खासतौर पर उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है जिनके पैरों में लंबे समय तक न भरने वाले घाव बन जाते हैं और गंभीर संक्रमण के कारण अंग विच्छेदन तक की नौबत आ जाती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डॉ. चक्रवर्ती सेंट्रल ग्लास एंड सेरेमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट सीएसआईआर.सीजीसीआरआई में सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने श्वंडर केयर नामक एक बायोएक्टिव ग्लास आधारित हील पैच विकसित किया है जो डायबिटिक फुट अल्सर के उपचार में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यह पैच विशेष प्रकार के बायोएक्टिव ग्लास से तैयार किया गया है जो घाव वाली जगह पर संक्रमण को नियंत्रित करने और नए ऊतकों के निर्माण को बढ़ावा देने में मदद करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज के मरीजों में रक्त संचार कम होने और प्रतिरोधक क्षमता घटने के कारण पैरों में बने छोटे घाव भी गंभीर रूप ले लेते हैं। समय पर उपचार न मिलने पर संक्रमण बढ़ सकता है जिससे कई मामलों में पैर या उंगली काटनी पड़ती है। ऐसे में यह नई तकनीक संक्रमण को प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रित कर घाव भरने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। इस उपचार की एक बड़ी विशेषता इसकी किफायती लागत है। पारंपरिक उपचार पद्धतियांए जिनमें बार.बार ड्रेसिंग एंटीबायोटिक्स और कभी.कभी सर्जरी शामिल होती है मरीजों पर आर्थिक बोझ डालती हैं। श्वंडर केयर पैच अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण आम लोगों की पहुंच में आ सकता है। भारत को डायबिटीज की राजधानी भी कहा जाता है जहां लाखों लोग टाइप.2 मधुमेह से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह स्वदेशी मेडिकल इनोवेशन न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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