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यूपी में एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट की सड़क नहीं है

यह सरकार का रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक

नई दिल्ली। यूपी की राजनीति ने पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी जाति और धर्म के इर्द-गिर्द सिमटी यह सियासत अब स्पीड और सड़क पर केंद्रित है, जिससे राज्य को एक्सप्रेसवे प्रदेश की पहचान मिली है। इस विकास यात्रा में दो नाम सबसे आगे हैं एक अखिलेश यादव, जिन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से विकास का नया मानक स्थापित किया और दूसरा योगी आदित्यनाथ, जिन्होंने एक्सप्रेसवे के नेटवर्क को राज्य के हर कोने तक फैला दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को पीएम मोदी द्वारा गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने वाले हैं। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ कंक्रीट की सड़क नहीं, बल्कि सरकार का एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है, जिसने अखिलेश यादव के विकास वाले दावों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। 2012 के यूपी चुनाव में एक्सप्रेसवे क्रेडिट एक बड़ा चुनावी मुद्दा था और 2027 तक इस ‘गंगा’ में बहुत पानी बह चुका होगा। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से सीधे जोड़ता है, जिससे यह देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक बन गया है। जहां अखिलेश यादव के समय एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से लखनऊ और आगरा के इर्द-गिर्द केंद्रित थे, वहीं गंगा एक्सप्रेसवे ने हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे दशकों से उपेक्षित जिलों को विकास की मुख्यधारा में ला दिया है।

यूपी की राजनीति में एक्सप्रेसवे को लेकर क्रेडिट लेने की होड़ हमेशा रही है। अखिलेश यादव अक्सर तंज कसते रहे हैं कि बाबा मुख्यमंत्री का जहाज हमारे बनाए एक्सप्रेसवे पर उतरा था, जबकि योगी कहते हैं कि पिछली सरकारों में एक्सप्रेसवे पैसे बनाने का जरिया थे और केवल कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित थे। उन्होंने एक्सप्रेसवे को भ्रष्टाचार मुक्त कर ग्रोथ इंजन में बदल दिया। यमुना एक्सप्रेसवे का श्रेय मायावती को जाता है, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था, जबकि पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण योगी ने कराया है, भले ही अखिलेश पूर्वांचल पर अपना दावा करते रहे हों। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ, योगी ने यह साबित कर दिया है कि उनका विजन कहीं ज्यादा व्यापक है।हालांकि, इस तेजी से बढ़ते नेटवर्क के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं और तेज रफ्तार के कारण होने वाले हादसों को रोकना एक बड़ी चुनौती है। वे-साइड एमिनिटीज जैसे अच्छे रेस्टोरेंट और पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ाने और औद्योगिकीकरण की रफ्तार को तेज करने की जरुरत है। अंतिम मील तक कनेक्टिविटी को मजबूत करके ही ग्रामीण आबादी को भी इसका पूरा लाभ मिल पाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे ने यूपी की राजनीति में योगी आदित्यनाथ की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे की जो शुरुआत की थी, योगी ने उसे एक महाअभियान में बदल दिया है। अब दौड़ केवल क्रेडिट की नहीं, बल्कि इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने की है।


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