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फ्रांस में भयंकर हिंसा पर भारत अलर्ट

नई दिल्ली। महंगाई समेत कई मुद्दों को लेकर फ्रांस में भयंकर बवाल जारी है। इसकी आग यूरोप के कई शहरों तक पहुंच चुकी है। फ्रांस में हालिया हिंसक प्रदर्शनों और लूटपाट की घटनाओं के बाद, पेरिस पुलिस ने कुछ इलाकों में बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक नया कर्फ्यू लगाने की घोषणा की है। अब भारत सरकार ने इसे लेकर अपने नागरिकों से अलर्ट रहने के लिए कहा है। भारत सरकार ने बुधवार को भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है और साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।

फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास ने फ्रांस में रह रहे या यात्रा कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें वर्तमान हिंसक प्रदर्शनों, लूटपाट और स्थानीय कर्फ्यू को देखते हुए अत्यधिक सावधानी बरतने, प्रदर्शन वाली जगहों व भीड़भाड़ से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। आपातकालीन स्थिति के लिए फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। पेरिस में दूतावास से संपर्क के लिए $33 6 48 34 00 63 और मार्सिले में कॉन्सुलेट जनरल ऑफ इंडिया के लिए $33 7 43 16 25 59  दिया गया है।

फ्रांस के अलावा यूरोप के कई देशों में भी बढ़ती महंगाई और अन्य मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ग्रीस की राजधानी एथेंस में भी हजारों छात्रों-शिक्षकों ने बढ़ती महंगाई, खर्च और शिक्षा बजट में कटौती के विरोध में प्रदर्शन किए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। इसी तरह, अल्बानिया की राजधानी तिराना में आठ दिनों से चल रहे प्रदर्शनों में पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। यहां छात्र ट्यूशन फीस कम करने और शिक्षा में सरकारी निवेश बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। फ्रांस, ग्रीस और अल्बानिया के अलावा, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल जैसे यूरोपीय देशों में भी महंगाई और शिक्षा सुधारों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को दावा किया कि विदेशी नेता फ्रांस के तनावपूर्ण सामाजिक माहौल का अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, अपनी सीमाएं बंद कीजिए और बहुत देर होने से पहले नियंत्रण अपने हाथ में लीजिए। मैक्रों ने इसे अस्वीकार्य और बेतुकी टिप्पणियां बताया और आरोप लगाया कि पेरिस व अन्य शहरों में हुई लूटपाट के बाद विदेशी स्तर पर गलत सूचनाओं का प्रसार किया गया।


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